प्रेस विज्ञप्ति

23.08.2019

PressRelease

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तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड
तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड परियोजना के लिए एकमुश्त टर्म की (एलएसटीके) अनुबंध अवार्ड किया गया
परियोजना बंद उर्वरक संयंत्रों के पुनरुद्धार में मदद करेगी

नई दिल्ली, 17 सितम्बर, 2019: तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (टीएफएल) के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए, परियोजना के लिए एकमुश्त टर्म की (एलएसटीके) अनुबंध अवार्ड किया गया तथा आज यहां माननीय मंत्री, रसायन और उर्वरक श्री डी वी सदानंद गौड़ा, माननीय मंत्री पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस और इस्पात श्री धर्मेन्द्र प्रधान तथा अन्य विशिष्ट अतिथिगणों की उपस्थिति में ‘अवार्ड समारोह’ आयोजित किया गया ।

एलएसटीके अनुबंध को मेसर्स वुहान इंजीनियरिंग कं, लिमिटेड, चीन को अवार्ड गया है, जिसे कठिन निविदा प्रक्रिया के बाद तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड के कोल गैसीफिकेशन और अमोनिया/यूरिया पैकेज के कार्यान्वयन के लिए एलएसटीके के कांट्रेक्‍टर के रूप में चुना गया है । मेसर्स वुहान को कोयला गैसीकरण संयंत्रों में ईपीसी का समृद्ध अनुभव है ।

घरेलू यूरिया क्षमता को बढ़ाने के लिए, फर्टिलाइजर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एफसीआईएल) की बंद उर्वरक इकाइयों का पुनरुद्धार भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता वाला एजेंडा रहा है । तद्नुसार, सरकार ने नामित सार्वजनिक उपक्रमों अर्थात् आरसीएफ, सीआईएल, एफसीआईएल तथा गेल की एक संयुक्त उद्यम कंपनी टीएफएल को एफसीआईएल की तालचर यूनिट के पुनरुद्धार के लिए अधिकृत किया है ।

रु.13,277 करोड़ के अनुमानित निवेश से यह परियोजना मिश्रित फीडस्टॉक के गैसीकरण के माध्यम से 1.27 एमएमटीपीए नीम कोटेड यूरिया का उत्पादन करेगी जिसमें उच्च राख वाला भारतीय कोयला और पेटकोक शामिल है। टीएफएल को अपनी कोयला आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उत्तरी अरखपाल की खदान के उत्तरी हिस्से को निजी खदान के रूप में आबंटित किया गया है और पेटोक का स्रोत आईओसीएल की पारादीप रिफाइनरी से होगा । इस परियोजना के वर्ष 2023 की तीसरी तिमाही में प्रारंभ होने की आशा है ।

परियोजना के ‘कार्य का उद्घाटन’ माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा सितंबर, 2018 में पहले ही कर दिया गया है और तब से टीएफएल साइट पर कई परियोजना पूर्व की गतिविधियों का निष्पादन किया जा रहा है जो वास्तविक परियोजना कार्य शुरू होने से पहले अनिवार्य हैं । वर्तमान में तालचर साइट पर साइट का विकास, निर्माण हेतु जल और विद्युत की व्यवस्था, गेस्ट हाउस का प्रावधान आदि जैसी गतिविधियाँ चल रही हैं

और जल्द ही पूरी हो जाएंगी । अन्य प्रमुख पैकेजों के लिए भी निविदा हेतु आगे की प्रक्रिया भी चल रही है और आशा है कि इस वित्तीय वर्ष के अंत से पहले अधिकांश निविदाओं को अवार्ड कर दिया जाएगा ।

इस परियोजना से यूरिया में भारत की आत्मनिर्भरता बेहतर होगी और कृषि विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे देश में यूरिया के आयात में कमी आएगी, इससे स्थानीय आबादी को रोजगार के अवसर प्राप्‍त होने के अलावा एलएनजी आयात पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की आशा है और क्षेत्र में अनुषंगी उद्योगों का भी विकास होगा । इस तकनीक के सफल होने पर भारतीय ऊर्जा के संदर्भ में पारंपरिक ताप विद्युत उत्पादन के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी उच्च राख वाले भारतीय कोयले के वैकल्पिक उपयोग के नए द्वारा खुलेंगे ।

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