गेल के बारे में

गेल (इंडिया) लिमिटेड भारत की अग्रणी प्राकृतिक गैस कंपनी है, जिसकी संपूर्ण प्राकृतिक गैस मूल्य श्रृंखला और उससे इतर भी एक मज़बूत और विविध उपस्थिति है। इसके प्रचालन कार्यों में प्राकृतिक गैस का संचरण और विपणन, द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और अन्य द्रव हाइड्रोकार्बन का उत्पादन, एलपीजी संचरण, पॉलिमर उत्पादन और विपणन, शहरी गैस वितरण, एलएनजी सोर्सिंग, शिपिंग और पुनर्गैसीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा पहल और अपस्ट्रीम अन्वेषण एवं उत्पादन गतिविधियाँ शामिल हैं।

गेल समग्र भारत में व्याप्त लगभग 16,421 किलोमीटर प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के व्यापक नेटवर्क का स्वामित्व और प्रचालन करता है। कंपनी सक्रिय रूप से कई पाइपलाइन परियोजनाओं के निष्पादन में कार्यरत है, जिसका उद्देश्य अपने राष्ट्रव्यापी कवरेज का और अधिक विस्तार करना है, जो भारत में प्राकृतिक गैस ट्रांसमिशन बाजार के लगभग 65% हिस्से पर नियंत्रण रखता है। गेल (इंडिया) लिमिटेड की प्रमुख पाइपलाइनों में शामिल हैं: एकीकृत हजीरा - विजयपुर - जगदीशपुर पाइपलाइन, दाहेज - विजयपुर -दादरी -बवाना-नांगल पाइपलाइन नेटवर्क, जगदीशपुर-हल्दिया-बोकारो- धामरा ( जेएचबीडीपीएल ) बरौनी - गुवाहाटी पाइपलाइन (जिसे प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा पाइपलाइन भी कहा जाता है) , दाभोल - बेंगलुरु पाइपलाइन नेटवर्क (डीबीपीएल) , कोच्चि- कूट्टनद -बेंगलुरु- मंगलुरु पाइपलाइन नेटवर्क (केकेबीएमपीएल), दहेज – उरण – दाभोल पाइपलाइन नेटर्वक, के.जी.बेसिन पाइपलाइन नेटवर्क, अगरतला, मुंबई एवं गुजरात क्षेत्र पाइपलाइन आदि।

प्राकृतिक गैस का व्यापार गेल का मुख्य व्यवसाय है और कंपनी घरेलू प्राकृतिक गैस बाज़ार में लगभग 47% की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखती है। गेल उर्वरक क्षेत्र द्वारा खपत की जाने वाली गैस का लगभग दो-तिहाई और पूरे भारत में गैस-आधारित बिजली संयंत्रों द्वारा उपयोग की जाने वाली गैस का लगभग 45% आपूर्ति करता है।

द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और अन्य द्रव हाइड्रोकार्बन (एलएचसी) पोर्टफोलियो में, गेल के पास देश में चार स्थानों, विजयपुर (2 इकाइयाँ), पाता, गंधार और वाघोडिया में पाँच गैस प्रसंस्करण इकाइयाँ (जीपीयू) हैं , जो प्राकृतिक गैस से उच्च अंशों का निष्कर्षण करती हैं। इनकी कुल एलपीजी और एलएचसी उत्पादन क्षमता 1425 केटीए है। कंपनी की भारत में एलपीजी उत्पादन में लगभग 10% और एलपीजी बिक्री में 7% हिस्सेदारी है।

गेल एलपीजी ट्रांसमिशन के लिए 2,040 किलोमीटर एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क का स्वामित्व और प्रचालन करता है, जिसमें मुख्य रूप से 1,427 किलोमीटर जामनगर-लोनी पाइपलाइन (जेएलपीएल) शामिल है, जो भारत के पश्चिमी और उत्तरी भागों को जोड़ती है और 610 किलोमीटर विजाग- सिकंदराबाद पाइपलाइन (वीएसपीएल) जो देश के दक्षिणी भाग में पूर्वी तट को जोड़ती है।

गेल पेट्रोकेमिकल्स उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस के उपयोग में भी अग्रणी है, जिसके पाता परिसर में कुल पॉलिमर क्षमता 810 केटीए है। इसकी सहायक कंपनी, ब्रह्मपुत्र क्रैकर एंड पॉलिमर लिमिटेड (बीसीपीएल), 280 केटीए अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जोड़ती है। सामूहिक रूप से, भारत की पेट्रोकेमिकल बिक्री में इनकी लगभग 15% बाजार हिस्सेदारी है। गेल शीघ्र ही उसर और पाता स्थित अपने आगामी पीपी संयंत्रों में 'जी-पोल' ब्रांड नाम से पॉलीप्रोपाइलीन उत्पादों का उत्पादन प्रारंभ करेगा और अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, गेल मैंगलोर पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (जीएमपीएल) में 'जी- टेक्स' ब्रांड नाम से शुद्ध टेरेफ्थैलिक एसिड (पीटीए) के उत्पादन के माध्यम से पॉलिएस्टर मूल्य श्रृंखला में अपनी उत्पाद श्रृंखला में विविधता लाएगा।

तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) बाजार में, गेल के पास अमेरिका, कतर, ऑस्ट्रेलिया आदि से लगभग 16.55 एमएमटीपीए का एक बड़ा पोर्टफोलियो है। गेल एक अग्रणी वैश्विक एलएनजी कंपनी के रूप में उभरा है और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एलएनजी व्यापार में सक्रिय रूप से शामिल है। गेल कई दीर्घकालिक सौदे हासिल करके, अपनी मांग को पूरा करने के लिए एलएनजी कार्गो का आयात करके और आयात टर्मिनलों से लेकर परिवहन और शहरी गैस वितरण नेटवर्क तक एलएनजी अवसंरचना का विस्तार करके अपने एलएनजी सोर्सिंग पोर्टफोलियो को मजबूत करता है।

गेल ने गेल भुवन, गेल सागर, गेल ऊर्जा, मेडिटेरेनियन स्पिरिट और ग्रेस एमिलिया नामक 05 एलएनजी वेज़ल को लाकर अपनी एलएनजी क्षमता में भी विस्तार किया है और कई स्पॉट एवं अल्पकालिक वेजल चार्टर के माध्यम से अपनी एलएनजी शिपिंग क्षमता का विस्तार किया है। कंपनी अपनी सहायक कंपनी कोंकण एलएनजी लिमिटेड के माध्यम से दाभोल में एलएनजी टर्मिनल का भी प्रचालन करती है । इस टर्मिनल को सभी मौसमों के लिए उपयुक्त बंदरगाह घोषित किया गया है।

गेल की 13 ईएंडपी ब्लॉकों में भागीदारी है, जिनमें से 10 भारत में, 2 ब्लॉक म्यांमार में और ईगल फोर्ड बेसिन, टेक्सास, अमेरिका में पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी - गेल ग्लोबल (यूएसए) इंक. के माध्यम से ईगल फोर्ड बेसिन, टैक्सास में 1 शेल गैस एक्रिएज है।

गेल भारत में शहरी गैस वितरण व्यवसाय में अग्रणी है, जिसके 8 संयुक्त उद्यम और 3 सहायक कंपनियाँ भारत में अपने शहरी गैस वितरण व्यवसाय के लिए कार्यरत हैं। गेल समूह की कंपनियाँ देश भर के कुल 307 भौगोलिक क्षेत्रों में से 72 में अधिकृत हैं। कंपनी ने अपनी समूह कंपनियों के साथ मिलकर 12.28 लाख पीएनजी कनेक्शन और 507 सीएनजी स्टेशन स्थापित किए हैं, जिससे देश भर में पीएनजी ग्राहकों की संख्या 9.71 मिलियन और सीएनजी स्टेशनों की संख्या 3,100 से अधिक हो गई है। सीएनजी और डी-पीएनजी की कुल बिक्री 54% बाजार हिस्सेदारी से अधिक है।

नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में, गेल अपने आंतरिक उपभोग लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कैप्टिव नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास और आंतरिक क्षमताओं को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करता है। गेल की कुल स्थापित क्षमता 145 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा है, जिसमें से लगभग 118 मेगावाट पवन ऊर्जा और लगभग 27 मेगावाट सौर ऊर्जा से प्राप्त होती है। वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में अपने कदम बढ़ाते हुए और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के साथ जुड़कर, गेल ने मध्य प्रदेश के विजयपुर में अपना पहला हरित हाइड्रोजन संयंत्र चालू किया है , जिसमें 10 मेगावाट का पीईएम इलेक्ट्रोलाइज़र है जो नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके 4.3 टन प्रतिदिन उच्च शुद्धता वाली हाइड्रोजन का उत्पादन करता है।

गेल पूरे भारत में शहरी गैस वितरण (सीजीडी) क्षेत्र को बायोगैस की आपूर्ति के लिए सीबीजी-सीजीडी सिन्क्रोनाइजेशन योजना को आगे बढ़ा रहा है। कंपनी ने 61 भौगोलिक क्षेत्रों में बायोगैस आपूर्ति शुरू कर दी है और रांची में 5 टन प्रतिदिन उत्पादन क्षमता वाला अपना पहला संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) संयंत्र चालू कर दिया है।

गेल ने एक महत्वाकांक्षी नेट ज़ीरो लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसका लक्ष्य 2025 तक स्कोप 1 और स्कोप 2 के लिए 100% डीकार्बोनाइजेशन और 2040 तक स्कोप 3 उत्सर्जन में 35% की कमी हासिल करना है। कंपनी ने कार्यान्वयन के लिए एक मज़बूत रोडमैप तैयार किया है, जिसमें कई डीकार्बोनाइजेशन रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इनमें प्राकृतिक गैस आधारित उपकरणों का विद्युतीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण, संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) का उपयोग, हरित हाइड्रोजन पहल, CO₂ वाष्पीकरण, ऊर्जा दक्षता में सुधार, और वनीकरण एवं प्रथम-पीढ़ी के इथेनॉल के माध्यम से कार्बन ऑफसेटिंग शामिल हैं।

गेल स्टोरी

पिछला अपडेट: 29 जनवरी, 2021

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